भूखा पेट बहुत कुछ सीखा देता हैं..

कौन क्या हैं कितना अपना हैं

सब बता देता हैं

मैंने सड़क पर मासूम को रस्सियों पर चलते देखा हैं

ये कमबख्त भूखा पेट बहुत कुछ सीखा देता हैं

चंद चिल्लर ही थे उसका मेहनताना

फिर भी उस मासूम चेहरे पे मैंने मुस्कान देखा हैं

लड़खड़ाती चलती रही कुछ पैसों के लिये

सच मे ये भूखा पेट बहुत कुछ सीखा देता है…!

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कश्मीर को लेकर पाक की साज़िश फिर नाक़ाम

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 35(a) औऱ धारा 370 हटाने की जानकारी गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में दी। गृहमन्त्री शाह ने उच्च सदन में कहा कि जम्मू कश्मीर से आतंकवाद समाप्त करने औऱ घाटी में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिये धारा 370 औऱ 35(a) को समाप्त करना आवश्यक है इसीलिये सरकार ने 370 के भाग एक को छोड़कर सभी भागों को समाप्त करने का फैसला किया हैं। मोदी सरकार के इस साहसिक कदम से जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया गया हैं। जम्मू कश्मीर औऱ लद्दाख़ दोनों को ही केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया गया हैं। विपक्ष की सभी आशंकाओं को गृहमंत्री ने दूर करते हुए कहा कि जैसे ही घाटी में हालात सामान्य होगे उसे वापस पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा। इस फैसले से पहले पूरे राज्य में भारी सैन्य बलों की तैनाती कर दी गयी थी साथ ही पूरे राज्य में धारा 144 लागू कर दिया गया था। फ़िलहाल गणतंत्र दिवस के बाद से कुछ स्थानों पर ढील दी गयी हैं औऱ जम्मू के कुछ भागों में इंटरनेट व टेलीफोन सेवा भी शुरू की जा चुकी हैं जबकि कश्मीर के कुछ संवेदनशील स्थानों में अभी भी कर्फ्यू हैं।

राज्यसभा में पारित जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल को लोकसभा में भी 370 वोट से पास हो गया। कांग्रेस,टीएमसी, ऐआईएमआईएम विपक्षी दलों ने इस बिल के खिलाफ वोटिंग की हालांकि सपा ने सदन से वाकआउट कर लिया। कांग्रेस ने इसका भारी विरोध किया लेकिन यहाँ उसे अन्य पार्टियों का साथ नही मिला। कांग्रेस की भाषा यहाँ पाकिस्तान से बखूबी मेल खाती हुई नजर आयी।

जम्मू कश्मीर में बदलाव की बयार-

इसी के साथ जम्मू कश्मीर औऱ लद्दाख़ को एक नई आज़ादी मिली है जो नए बदलाव लेके आया हैं-

– दो राज्यों की नागरिकता समाप्त हो जाएगी

– जम्मू कश्मीर का अलग संविधान व भेदभाव पूर्ण कानून समाप्त होंगे।

– दूसरे राज्यों के लोग अब घाटी में अपना घर बसा सकेंगे व मताधिकार भी मिलेगा।

– सरकारी योजनाओं को अब घाटी तक आसानी से पहुँचाया जा सकेगा।

-अल्पसंख्यक समुदाय को आरक्षण की सुविधा।

– लद्दाख़ को यूटी(केंद्रशासित प्रदेश) की बरसो पुरानी मांग पूरी हो गयी।

पाकिस्तान के सीने पर लोटा साँप

कश्मीर से धारा 370 क्या हटी पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। उसने ताव मे आकर भारत से अपने द्विपक्षीय व्यापारिक सम्बन्ध समाप्त कर लिए। इतना ही नही पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस को भी बंद कर दिया औऱ अपने उच्चायुक्त को भी दिल्ली छोड़ने का फरमान सुना दिया हैं। पाकिस्तान के हालात इनदिनों वैसे भी खस्ताहाल हैं उसपर इमरान सरकार पर कश्मीर मुद्दे को लेकर लगातार पाकिस्तानियो के द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। कई अलगाववादी नेताओं की ही तरह इमरान खान ने भी कभी नही सोचा था कि भारत सरकार कश्मीर के परिपेक्ष्य में इतना बड़ा फैसला कर लेंगी औऱ किसी को कानोंकान खबर भी नही होगी। अब इतने बड़े झटके से उबरने के लिये या यों कहे उबरने के दिखावा करने के लिये इमरान सरकार व उनके पिट्ठू भारत को न्यूक्लियर हमले की गीदड़ भभकी दे रहे। पाकिस्तान को विश्व के सभी देशों ने भारत के इस फैसले का समर्थन करते हुए स्पष्ट कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला हैं इसके बाद पाकिस्तान ने चीन से मदद की गुहार लगाई औऱ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक अनोपचारिक बैठक हुई जिसका परिणाम भारत के पक्ष में रहा। अब पाकिस्तान सिर्फ सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रहा हैं।

पाकिस्तान को विश्व के सभी देशों ने भारत के इस फैसले का समर्थन करते हुए स्पष्ट कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला हैं इसके बाद पाकिस्तान ने चीन से मदद की गुहार लगाई औऱ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक अनोपचारिक बैठक हुई जिसका परिणाम भारत के पक्ष में रहा। अब पाकिस्तान सिर्फ सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रहा हैं।

कानपुर का भौकाल टाइट हैं… Know my city… Lovable kanpur

कानपुर शहर अपने आप मे एक अनूठी मिशाल पेश करता हुआ आज भी अपनी कनपुरिया तहज़ीब बरकरार रखे हुए है। यहाँ की भाषा,रहन-सहन,लोगों का हँसमुख औऱ चुटीला अंदाज़ औऱ यहाँ का खान-पान सभी को अपनी ओर आकर्षित करता हैं।

उ.प्र का सबसे बड़ा शहर जो की गंगा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित होने के नाते अपने आप मे औऱ भी खास हो जाता हैं। आधुनिक औऱ प्राचीन संस्कृति के सन्तुलित तालमेल की झलक आज के कानपुर नगरियाँ में खूब देखने को मिलती हैं। जहाँ जेड-स्क्वायर मॉल ,ब्लू वर्ड वाटर पार्क,एलन फॉरेस्ट ज़ू यहाँ की आधुनिकता का परिचय देते हैं वही ऐतिहासिक औऱ पौराणिक मान्यताओं के लिये चर्चित ब्रह्मावर्त(बिठूर) त्याग औऱ तपस्या का संदेश दे रहा हैं।

यू तो शहर में घूमने-फिरने के लिये हज़ारो जगह हैं मगर कानपुर को अन्य शहरों से जो अलग बनाता हैं वह हैं यहाँ का कनपुरिया अंदाज़। यहां अक्सर “कंटाप, रंगबाज,औऱ टोपा जैसे शब्द बाहर से आने वालों को अटपटे लग सकते हैं मगर कनपुरियों का दिन इन शब्दों के बिना पूरा नही होता।” तो देखते हैं औऱ कौन सी बातें हैं जो कानपुर को खास बनाती है-

कानपुर के सैर-सपाटा

बाहर से आने वालों के लिये कानपुर में घूमने की हज़ारो जगह हैं जैसे राधा-कृष्ण को समर्पित और अपनी खूबसूरती के लिये विख्यात जे के टेम्पल।

ताम्रचीनी औऱ कांच की बनावट का सुंदर मेल जैन ग्लास मंदिर।

उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ा प्राणिउद्यान एलन फॉरेस्ट ज़ू जहाँ पर 1250 जानवर है।

1875 में 1857 के विद्रोह में मारे गए अंग्रेज़ो के समर्पित कानपुर मेमोरियल चर्च

इसके अलावा नानाराव पार्क,मोतीझील, करगिल पार्क,इस्कॉन मंदिर,बिठूर भी घूमने फिरने के शौकीनों को खूब पसंद आती हैं।

खाने के शौकीन कनपुरिये

अगर आप फूडी हैं तो कभी परेड चौराहे के रुख करें तो रुक कर यहाँ की पूरे प्रदेश में मशहूर “बदनाम’ कुल्फी ज़रूर खाए औऱ अगर बदनाम कुल्फी के बाद ठगने का दिल करे तो आइये ठग्गू के लड्डुओं के ओर..जो मुँह में ऐसी मिठास घोलता हैं जिसे भूलना नमुमकिन हो जाता हैं…

अब मीठे से दूर कुछ चटपटा खाने के इरादे से निकले हैं तब तो आप नवीन मार्केट के गड़बड़ चाट का लुत्फ ज़रूर उठाये औऱ अगर पानी-बताशे की तलब हो तो बिरहाना रोड आये।

बिरहाना रोड के शंकर पताशे वाला के यहाँ के बताशे पानी मुँह में बाढ़ लाने के लिये काफी हैं। बिरयानी के चाहने वालों के लिये काकादेव पर बाबा बिरयानी खास हैं। कानपुर के चटपटा स्वाद पेट तो भर देता हैं लेकिन मन नही..

कनपुरियों का टोपा हुआ वर्ल्ड फेमस

कानपुर की भाषा आज पूरे देश में अपनी चंचलता,रुबिलापन औऱ बेफिक्री के लिये जानी जाती हैं। कानपुर की भाषा को केंद्र में रखती जॉली एलएलबी-2, टशन, तनु वेड्स मनु-1, तनु वेड्स मनु-2, बंटी और बबली, दबंग-2, साईं वर्सेज आई, कटियाबाज, देसी कट्टे, बाबर, हंसी तो फंसी, होटल मिलन, मरुधर एक्सप्रेस, भैया जी सुपरहिट जैसी फिल्में पूरे देश मे कानपुर के ‘भौकाल टाइट’ कर दिए हैं।

कंटाप -भौकाल -चौकस -बकैत-खलीफा-बकलोली-चिरांद-धांसू इन से कनपुरियों के दिन की शुरआत होती हुई
विधिवत मारेंगे और कौनौ मुरौवत न करेंगे।

ज्यादा बकैती न करो।

अबहिं मार मार के हनुमान बना देबे।
-टोपा हो का, दीहिस कंटाप

इन जुमलों के साथ दिन की समाप्ति होती हैं..तो कुछ ऐसा हैं हमारा कानपुर शहर…यहां लोगों के घर ज़रूर छोटे हैं मगर दिल बहुत बड़ा..❤️

Pic source:Google

इसमे “पाकिस्तान” का घाटा “भारत” का कुछ नही जाता..

कश्मीर से धारा 370 क्या हटी पाकिस्तान इसकदर बौखला गया कि उसने ताव मे आकर भारत से अपने द्विपक्षीय व्यापारिक सम्बन्ध समाप्त कर लिए है। इतना ही नही पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस को भी बंद कर दिया औऱ अपने उच्चायुक्त को भी दिल्ली छोड़ने का फरमान सुना दिया हैं।

पाकिस्तान के हालात इनदिनों वैसे भी खस्ताहाल हैं, वहा की कैबिनेट को नान-रोटी के दाम तय करने पड़ रहे हैं। उसपर से इमरान सरकार पर कश्मीर मुद्दे को लेकर लगातार पाकिस्तानियो के द्वारा दबाव भी बनाया जा रहा है। कई अलगाववादी नेताओं की ही तरह इमरान खान ने भी कभी नही सोचा था कि भारत सरकार कश्मीर के परिपेक्ष्य में इतना बड़ा फैसला कर लेंगी औऱ किसी को कानोंकान खबर भी नही होगी। अब इतने बड़े झटके से उबरने के लिये या यों कहे उबरने के दिखावे के लिये इमरान सरकार व उनके पिट्ठू भारत को न्यूक्लियर हमले की गीदड़ भभकी दे रहे।

जबकि वो भूल रहे हैं कि यह सरकार हाथ पर हाथ धरकर बैठने वालों में से नही बल्कि सेना के हाथ खुले कर ‘उरी औऱ बालाकोट’ जैसी सर्जिकल स्ट्राइक्स कर मुहतोड़ जवाब देने वाली हैं। पाक की इन गीदड़ भभकियों औऱ द्विपक्षीय व्यापारिक सम्बधों के निलंबन से भारत और उसकी अर्थव्यवस्था को कोई फर्क नही पड़ने वाला हैं जबकी पाकिस्तानियों की निर्भरता भारतीय उत्पादों पर ज्यादा होने के कारण पाक को ही ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। मात्र टमाटर बैन करने से जो मुल्क तौबा तौबा के मुकाम पर आ गया था वह मुल्क अब हमपर व्यापार खत्म कर दबाव बनाना चाहता हैं जबकि विशेषज्ञों की माने तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान पाक को ही होगा क्योंकि पाक भारत के मुकाबले ज्यादा उत्पादों का आयात करता हैं..

अब मिली वास्तविक आज़ादी

जम्मू कश्मीर को लेकर जारी सस्पेंस आखिरकार समाप्त हो ही गया। गृहमन्त्री अमित शाह ने सोमवार को सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए धारा 370 औऱ अनुच्छेद 35(a) की कैद से जम्मू कश्मीर को आज़ाद कराने के लिये संकल्प पत्र पेश किया जिसे राज्यसभा में 125 वोटों से पास करा लिया गया।

अमित शाह ने धारा 370 हटाने के जो कारण दिये वह सभी वाजिब कारण हैं क्योंकि इसी धारा के कारण जम्मू कश्मीर को वो हक़ सुविधाए नही मिलती जो अन्य राज्यों को मिलती हैं साथ ही अगर कश्मीर के आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन का कोई कारण हैं तो वो हैं धारा 370।

जिसके कारण वहां लोकतंत्र का अर्थ भारत के विरुद्ध ज़हर उगलना व पुलिस जवानों पर पत्थर फेंकना बन चुका था। कश्मीरियों को भारत के ख़िलाफ़ भड़काना औऱ पाक परस्ती करना वहां की स्थानीय पार्टियों का मुख्य एजेंडा बन चुका था मगर पूर्व मुख्यंमत्री मेहबूबा मुफ़्ती व उमर अब्दुल्ला को नज़रबन्द कर दिया गया हैं ताकि वो किसी तरह की अफवाह न फैला सके। कांग्रेस, जेडीयू,पीडीपी ने इस बिल का विरोध कर अपना असली रूप उजागर किया जबकि बसपा,बीजद,ysr कांग्रेस ने मौके की नजाकत समझते हुए प्रस्ताब के पक्ष में वोटिंग की। इस वक़्त पूरे पाकिस्तान में इस खबर से भूचाल आयी हुई हैं लेकिन एक आम भारतीय जो कश्मीर में बसने का ख्वाब देख रहा था उसके सपने हकीकत से बस एक कदम की दूरी पर हैं वो कदम हैं लोकसभा।